मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010

मेरा गाँव

मेरे गाँ का नाम ताया है| यह  गाँ  बहुत छोटा है, इस  गाँ  में लगभग २००० लोग रहते हैं| ताया बोर्शोद  प्रदेश में, सैरैंच के नज़दीक है| ताया उत्तर-पूर्व हंगेरी में है|
इसके चारों ओर पहाड़ और जंगल हैं| खेद की बात है कि  गा में बहुत दर्शनीय स्थान नहीं हैं| यहाँ चार पुराने चर्च हैं : रोमन कैथालिक चर्च, यूनान वासी चर्च, लूटेरण तथा प्रोटेस्टैंट| लूटेराण चर्च में सितम्बर अठारह सौ दो (१८०२) में कोशुथ लयोश का बपतिस्मा हुआ था| हंगेरी में कोशुथ लयोश बहुत प्रसिद्ध राजप्रतिनिधि थे| ताया में एक सुन्दर पुराना महान महल भी हैगाँ में एक स्कूल है और  गाँ के अंत में रेलवे स्टेशन है| आम तौर से  गाँ के लोगों के घरों में बाग़ भी हैं| लोग अपने बागों में बहुत सब्जियाँ और फल लगाते हैं जैसे आलू, टमाटर, मिर्च, दाल तथा सेब, नाश्पाती, अंगूर आदि| कुछ लोग जानवर भी पालते हैं जैसे कुत्ता, बिल्ली, मुर्गी, बतख, कलहंसी, बकरा, गाय, वगैरह| कोई-कोई खेती करता है, कोई-कोई  शहर काम करने जाता हैगाँ  में बहुत दुकान नहीं हैं|
ताया तोकाय से दूर नहीं है, तो यह देहात बहुत मशहूर हैगाँ  में बहुत पुराने वाइन के तहखाने हैं| बहुत लोगों के लिए वाइन या शराब बनाना गुजारे का साधन है|
प्रकृति  गाँ  के पास बहुत सुन्दर है| चारों ओर बहुत पेड़ पौधे हैं| लोग पहाड़ में सैर करना पसन्द करते हैं| ताया में कभी-कभी पर्यटक टहलते हैं जो शराब (वाइन) में रुचि लेते हैं|
मुझे गाँ  में रहना पसन्द आता हैगाँ   शान्त और चुप है, हवा ताजा साफ़ है|

बुदापैश्त


बुदापैश्त हंगेरी की राजधानी है। यह शहर तीन भागों में बँटा हुआ है : बुदा, पैश्त और ओबुदा। वे १८७३ तक अलग-अलग शहर थे।
डान्यूब नदी बुदापैश्त को दो भागों में बाँटती है। बुदापैश्त में नौ पुल हैं जो बुदा और पैश्त को एक दूसरे से जोड़ते हैं। यहाँ तीन द्वीप हैं : चैपैल, मार्गित और हयोज्यारी।
मर्गित-द्वीप पर लोगों को सैर करना पसन्द आता है, इसके अलावा वे पिकनिक और आराम कर सकते हैं। द्वीप के दक्षिण भाग पर एक बड़ा फ़व्वारा है, जो गर्मियों में संगीत वाला है। यहाँ एक मठ के खंडहर भी हैं। यह मठ १३वीं शताब्दी में बनाया गया था।
इस शहर में काफ़ी मशहूर स्थान हैं, उदाहरण के तौर पर पार्लामेंट, हीरोज़ स्क्वेर, संग्रहालय, आपेरा हाउज़, आपरेटा थियेटर पैश्त में हैं।
बुदा क़िला, फ़िशरमैन बास्टियन और भारतीय दूतावास बुदा में हैं। बुदा क़िला दुनिया की सबसे सुन्दर ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। इसमें सदियों पहले राजा रहते थे, आजकल यहाँ राष्ट्रीय गैलरी और संग्रहालय हैं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण पर्यटक केंद्र है।
वासी और अन्द्राशी सड़कें बुदापैश्त की मुख्य सड़कें हैं जहाँ पर पर्यटक खरीदारी कर सकते हैं। यहाँ लोग पारंपरिक हंगेरियन भोजन भी कर सकते हैं।

कैरैपैश


गाँव के क्षेत्र को बहुत अच्छे प्राकृतिक दहेज हैं। इस्लिए यह देहात पुराने काले से बसा हुआ था। गाँव का नाम पुराने हंगेरियन कैरैप जहाज़, नाव शब्द से संबंध रखता है। शायद छोटे जहाज़ बनाने वाले यहाँ रहते थे।

पहली बार कैरैपैश के नाम का चर्चा ११४८ में एक दस्तावेज में की। १५४४ में गाँव ओत्तोमान अधिकृत के नीचे गया था। १५९६ में ततार के समय में पूरा निवासी भाग गया या मर गया। देहात लम्बे अरसे तक न बसा हुआ था फिर १६९० के वर्ष में गर्मनी और हंगेरियन आधिवासियों से बसा हुआ था। १७०३ में राकोज़ि अनाधिनता के युद्ध के समय में निवासी फिर से भाग गया था। १७११ में पुराने गर्मनी और हंगेरियन परिवार के अलावा गाँव नये गर्मनी, हंगेरियन और स्लोवाकिअन परिवार से फिर से बसा हुआ था। १७५० में कैरैपैश देश के रक्त चक्कर में गया था क्योंकि किरायी की गाड़ी का रास्ते पर था जो गाड़ियों से भीड़-भाड़ था। रेलमार्ग की बनावट तक पैश्त और गोदोल्लो के बीच में कैरैपैष किरायी की गाड़ी का पहला अड्डा था। १९७८ में कैरैपैश और किश्तर्च कैरैपैश्तर्च के रूप में एक किया था। फिर सोलह साल के बाद उन्होंने अलग-अलग किया।

मलोम और सिलश नदी के पास पत्थर, तांबा, लौह के समय से और रौमन तथा कौम के प्रवासन के समय से खोज पाये थे। चोर्स खंदक रौमन समय से उत्पन्न है। संत इश्त्वान के समय से चर्च की वेदी के खड़ चर्च पर्वत पर पाये थे। काल्वारिअ पहाड़ पर भूतपूर्व चर्च हुसित लोग ने बनाया था और पहला समाधि क्षेत्र भी यहाँ था। १९११ में अलगाववादी शैली सा चर्च कैरैपैश वालों ने बनवाया था जिसे संत अन्न को अर्पण किया।

१९५० के वर्ष तक गाँव अपना स्लोवाकिअन स्वभाव धरता था। मगर आजकल स्लोवाकिअन परमपरा और तोथ भाषा का इस्तमाल भूल गये। परमपरा की रक्षा के लिए कलारिश परमपरा को रक्षा वाली सभा युद्ध करता है।

जैसे भूत में आजकल भी गाँव अपना शान्ति और पहाड़ी देहात से अधिक नये परिवार का आकर्षित करता है। 

ऐगैर

सिल्विअ सञि--
ऐगैर उत्तर हंगेरी के सब शहरों में से दूसरा बड़ा शहर है। इस नगर में कई ऐतिहासिक इमारतें और प्रसिद्ध संग्रहालय हैं। ऐगैर वाले लोग सोचते हैं कि इस शहर का नाम उन एगैर के पेड़ों के नाम पर पड़ा है जो ऐगैर की छोटी नदी के तट पर खड़े हैं। ऐगैर वाइन के कारण भी बहुत मशहूर है क्योंकि ऐगैर वाला बुलख़ून यहाँ बनता है।

ऐगैर के बीचों बीच एक महत्त्वपूर्ण क़िला है जिसपर सदियों पहले तुर्की सेनाओं ने हमला किया था। यह पत्थर से बनी इमारत है, जिसे सम्राट चौथा बेल ने बनवाया था। क़िले में दो संग्रहालय हैं। क़िले के सामने गेज़ गार्दोञि नामक एक मशहूर लेखक का घर है। ऐगैर में अनेक ऐतिहासिक तुर्की इमारतें हैं। उदाहरण के लिए मीनार और तुर्की हमाम हैं। यह मीनार यूरोप की सब से ऊँची मीनार हैं।  यह चालीस मीटर ऊँची है। अंदर ही अंदर उपर तक जाने के लिए चक्करदार सीढ़ियाँ हैं।
ऐगैर में एक बड़ा पार्क भी है। आम तौर पर ऐगैर के लोग यहाँ मनोरंजन करते हैं। चारों ओर पेड़ों से भरा,  हरी घास का सुंदर लॉन हैं। लोग यहाँ टहलते, किताब पढ़ते और दुनिया ज़माने की बाते करते हैं। बालक स्कूल के बाद इस पार्क में कसरत करते, टेनिस और  फ़ुटबाल खेलते हैं। पार्क के सामने मंच, स्विमिंग पूल और पुस्तकालय है। मंच पर गर्मियों में नाटक होते हैं। ऐगैर में दो बड़े लौह फाटक भी हैं जिन्हें एक लोहार हैनरिक फ़ज़ौल ने बनाया था। आश्चर्य की बात है की बात यह है कि लोहे के इन फ़ाटकों में ज़ंग नहीं लगता।
ऐगैर की छोटी नदी के पास ऐगैर का सब से बड़ा चौक है। इसका नाम दौबो चौक है। यहाँ दो बहुत प्रसिद्ध मूर्तियाँ हैं। दौबो चौक पर एक पुराना चर्च और अंधे पर्यटकों के लिए एक लौ नक्शा है। चर्च का नाम मिनौरिता है। इस चर्च में गर्मियों में हमेशा अनेक विवाह होते हैं। पर यह चर्च ऐगैर का सबसे बड़ा चर्च  नहीं है।
बज़िलिका मिनौरिता की तुलना में लगभग तीन गुना बड़ा है। यह एक पीली इमारत है जो उन्नीसवीं शती के प्रारंभिक दशकों से यहाँ खड़ी है। चर्च में दो लाट और एक गुम्बद है। यहाँ हमेशा बड़ी भीड़-भाड़ रहती है, क्योंकि लोग इस चर्च में स्तुति करते हैं। इसके सामने ऐगैर का विश्वविद्यालय है।
ऐगैर में कई प्रसिद्ध हंगेरीयन लोग,  उदाहरण के लिए गेज़ गार्दोञि, बालिंत बलश्शि एक महाकवि, इश्त्वान दौबो और शांदोर ब्रोदि लेखक भी रहते हैं।