शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

छोटा राज कुमार

शिमोन रीता

छोटे राज कुमार की कहानी मेरी मनपसंद कहानी है.मुझे अभी भी याद है जब प्रारंभिक विद्यालय में अध्यापिका ने उसे पढने को कहा. छोटे सर्ग,सरल भाषा और चित्र.एक छोटे लडके के आत्म की दुनिया जो कठिन दिखती है और फिर भी उतनी सहज है कि हम उससे प्यार करने लगते हैं.
यह दुनिया एक बच्चे की है और उसमें सब मिलता है –मनुष्यों का सम्बन्ध,मित्रों की जिम्मेदारी विश्वास,प्यार जिसके बारे में हमें जानना चाहिए.छोटे राजकुमार का एक गुलाब है.वह बहुत प्यार और सावधानी से उसकी देखभाल करता है.उसके बाद छह राज कुमार और लोमडी की मुलाक़ात होती है.उनका सम्बन्ध बहुत विशेष है.एक अनजान जानवर से दोस्ती करना एक बिलकुल अजीब विचार है.लेकिन छह राज कुमारों के लिए नहीं.इस स्थिति में दोस्ती का मापदंड नहीं है.
लोमडी का एक नया जीवन शुरू होता है जब छह राजकुमार उसे अपना दोस्त बनाते हैं.गेंहू के खेत देख कर प्यारे दोस्त की याद आती है.
विदा लेते हुए लोमडी एक राज़ बताती है कि जो चीजें तुम देखते हो वह सब बेकार हैं,पर जो हमारे दिल में हैं वे महत्त्वपूर्ण हैं.
जब मेरा दोस्त मुझसे लड़ाई करता है तो मैं हमेशा उससे पूछती हूं कि क्या तुमने छोटे राज कुमार को पढ़ा?और जब उसका उत्तर नहीं होता है तो मैं उसे समझाती हूं कि हां अगर तुमने उस कहानी को पढ़ा होता तो तुम्हें मालूम होता कि लड़कियो का दिल एक फूल (गुलाब )है.तुम इस तरह उसे तोड़ नहीं सकते.
छह राज कुमारों का दिल अनुभवों से भरपूर था और यह बताने का एक अच्छा उदाहरण है कि दोस्तों के साथ बिताया गया हर क्षण मूल्यवान है.
इस कहानी में एक बड़ा मनुष्य भी है जो उड़ने वाला है.छह राज कुमारों के विचित्र प्रश्न उसकी आँख खोलते हैं और उसका जीवन बदल जाता है.
इस कहानी में एक बच्चा बड़े व्यक्ति को उपदेश देता है.इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि बचपन कभी कभी उच्च हो सकता है.

1 टिप्पणी:

  1. आदरणीय श्रीशर्मासाहब,

    बहुत बढ़िया बात कही आपने..!!
    बचपन में विक्रम वैताल की कहानियाँ और चांदामामा जैसे प्रकाशन की रंगीन सचित्र कहानियाँ इतनी अच्छी लगती थीं कि, खाना तक भूल जाते थे..!!

    आपने हमारा बचपन याद दिलाया,आपका बहुत धन्यवाद।

    मार्कण्ड दवे।
    http://mktvfilms.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं